संत शिरोमणी श्री 108विद्यासागर जी

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संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज को गुरसराय मेंन बाजार में भाव सहित में दी श्रद्धांजलि  दी गई उमरा जनसैलाब गुरसरायनगर के मेन बाजार में आज दिनांक 25 फरवरी को दोपहर 1:00 बजे से सकल दिगंबर जैन समाज गुरसराय के कि लोगों ने अपने प्रतिष्ठान बंद रखकर गुरसराय नगर के लोगो ने संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज की छायाचित्र पर दीपक जलाकर पूजा अर्चन करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई इस दौरान केंद्रीय राज्य मंत्री भानु प्रकाश वर्मा क्षेत्रीय विधायक जवाहरलाल राजपूत सहित काफी संख्या में जैन समुदाय वा अन्य समुदाय के लोग श्रद्धांजलि कार्यक्रम में उपस्थित रहे वही हम आपको बता दें कि आचार्य विद्यासागर जी महाराज का संपूर्ण जीवन आध्यात्मिक प्रेरणा से भरा रहा। उनके जीवन का हर अध्याय, अद्भुत ज्ञान, असीम करुणा और मानवता के उत्थान के लिए अटूट प्रतिबद्धता से सुशोभित है।

संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी महाराज जी सम्यक ज्ञान, सम्यक दर्शन और सम्यक चरित्र की त्रिवेणी थे। उनके व्यक्तित्व की सबसे विशेष बात ये थी कि उनका सम्यक दर्शन जितना आत्मबोध के लिए था, उतना ही सशक्त उनका लोक बोध भी था। उनका सम्यक ज्ञान जितना धर्म को लेकर था, उतना ही उनका चिंतन लोक विज्ञान के लिए भी रहता था।

करुणा, सेवा और तपस्या से परिपूर्ण आचार्य जी का जीवन भगवान महावीर के आदर्शों का प्रतीक रहा, उनका जीवन, जैन धर्म की मूल भावना का सबसे बड़ा उदाहरण रहा। उन्होंने जीवन भर अपने काम और अपनी दीक्षा से इन सिद्धांतों का संरक्षण किया। हर व्यक्ति के लिए उनका प्रेम, ये बताता है कि जैन धर्म में ‘जीवन’ का महत्व क्या है। उन्होंने सत्यनिष्ठा के साथ अपनी पूरी आयु तक ये सीख दी कि विचारों, शब्दों और कर्मों की पवित्रता कितनी बड़ी होती है। उन्होंने हमेशा जीवन के सरल होने पर जोर दिया। आचार्य जी जैसे व्यक्तित्वों के कारण ही, आज पूरी दुनिया को जैन धर्म और भगवान महावीर के जीवन से जुड़ने की प्रेरणा मिलती है।

B9News24
Author: B9News24

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