लोकेशन गुरसराय झांसी
गुरसराय नगर पुराना बस स्टैंड पर उत्साह से होली दहन हुआ
होली का त्यौहार बड़े ही हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है और होली का त्यौहार की बात करें तो यह है गिले शिकव नफरत को भूल कर आपसी प्रेम का त्योहार कहा जाता है वही ग्रामीण अंचलों में होली के त्यौहार में लोगों में जहां उत्साह दिखाई देता है तो प्रेम का एक अनूठा त्यौहार भी कहा जाता है
होली दहन की रात
होली दहन के पूर्व गोबर से बने हुए बरूले और साथ में गेहूँ की बाली जला कर लाते होलिका दहन में प्रचलित करते हैं और घर लाकर रखा जाता है आने वाली फसलों में गेहूं चने की डालियां और यहां तक की होली दहन के बाद घर में आग लाने की परंपरा यह प्राचीनतम मानी जाती है वही उसी आग से बाटी बनाई जाती है ओर फिर पूजन होता है
होली दहन के समय सभी लोग गोलाकार आकृति बनाते है ओर परिक्रमा करते वही बुरी बला जिसमे अपने सर से सात बार राई, उड़द, नमक, मिर्च, आदि उसी मे दहन कर देते है!
होली दहन में स्थानीय पंडा बजारी जो कि उसमें एक ध्वज लगते हैं डंडे के रूप में और वह जिस दिशा में गिरता है उसे स्थानीय वर्षा कल का महत्व भी बताया जाता है कि इस वर्ष में कैसी बारिश और आने वाले क्षेत्र से नया साल कैसा होगा
होली का त्यौहार अक्सर लोगों को सुख दुख में एकता बढ़ाने वाला माना जाता है परंपरा आज भी बनी है होलिका भक्त प्रहलाद को अपनी गोद में बिठा हुए आकृति बनाई गई और तिलक बंधन करके सत्य की जीत कही जाती है वही फाग गायन का अपना अलग महत्व होता है जिसमें नगरिया की धुन पर मंदिरों से लेकर घरों तक गायन करते हैं और आनंद लेते हैं गांव की होली बड़ी ही अनूठी कही जाती हैं।







