लोकेशन – झाँसी
होली का उदगम स्थल भक्त प्रहलाद की नगरी एरच (होली स्पेशल स्टोरी)
*बुंदेलखण्ड में झांसी जिले के एरच कस्बे से हुई है होली की शुरुआत,सतयुग में यहां हुआ करती थी हिरणकश्यप की राजधानी*
जिला झाँसी के तहसील गरौठा में एरच कस्बे के पास स्थित बेतवा नदी के किनारे बसे डिकोली गांव को ऐतिहासिक डीकांचल पर्वत के किनारे बसा गांव माना जाता है! यह मान्यता है कि इसी डीकांचल पर्वत से भक्त पहलाद को नदी में फेंका गया था जिस स्थान पर भक्त प्रहलाद को फेंका गया था उसे वर्तमान समय में लोग प्रहलाद कुंड के नाम से जानते हैं!
जिला झांसी मुख्यालय से लगभग 80 किलोमीटर दूर तहसील गरौठा में स्थित एरच कस्बे का धार्मिक दृष्टिकोण से काफी महत्व है इस स्थान पर कई ऐसे अवशेष मौजूद है जिनके आधार पर इसे हिरणकश्यप की राजधानी माना जाता है! मान्यता है की होली पर्व की शुरुआत झांसी जिले के इसी एरच कस्बे से हुई थी! पुरातात्विक खोज में यहां कई ऐसे प्रमाण मिले हैं जो इस बात की पुष्टि करते हैं कि किसी समय में इस स्थान पर विकसित सभ्यता निवास करती थी!
झांसी जिले के गजेटियर में इस बात का उल्लेख है कि एरच कस्बा एक ऐतिहासिक नगर है जहां से होली की शुरुआत हुई थी एरच कस्बे के पास स्थित बेतवा नदी किनारे बसे डिकोली गांव को ऐतिहासिक डीकांचल पर्वत के किनारे बसा गांव माना जाता है यह मान्यता है कि इस डीकांचल पर्वत से भक्त प्रहलाद को नदी में फेंका गया था!जिस स्थान पर भक्त प्रहलाद को फेंका गया था उसे वर्तमान समय में लोग प्रहलाद कुंड के नाम से जानते हैं!
एरच कस्बे में महल और प्राचीन भवनों के अवशेष मिलने का भी इतिहास रहा है पौराणिक इतिहास के अनुसार हिरणकश्यप के महल का भी जिक्र किया जाता है कि इसी महल के पास हिरण कश्यप की बहन होलिका भक्त पहलाद को अपनी गोद में लेकर आग में बैठी थी और जल गई थी! एरच कस्बे में भगवान नरसिंह का एक प्राचीन मंदिर स्थित है मंदिर में नरसिंह भगवान की मूर्तियां मौजूद है जिन्हें देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं!
पुरातत्व विभाग के अनुसार यहां पुरातात्विक खुदाई में कई ऐसे साक्ष्य मिले हैं जो बताते हैं कि झांसी जिले का एरच कस्बा लगभग लाखों साल पुराना है! इतिहास की जानकारी और संस्कृति के अनुसार बताते हैं कि हिरण कश्यप के बाद इस स्थान पर देवताओं और दानवों की पंचायत हुई थी पंचायत में दोनों पक्षों ने एक दूसरे को रंग अबीर लगाकर दुश्मनी को मिटाने का संदेश दिया था और इस समय से होली की शुरुआत हुई!
यहाँ अनेको वर्षो से परम्परागत तरीके से होली का उत्सव बड़े धूमधाम से मनाया जाता हैँ पिछले कुछ वर्षो से यहाँ के कार्यक्रम को राज्य सरकार द्वारा भी मान्यता प्रदान कर अनुदान दिया जाता हैँ इसी क्रम में इस वर्ष भी 21मार्च से 25 मार्च तक होली महोत्सव मनाया जा रहा हैँ जिसमे विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं।







