बस्ती जिला
सरयू नदी के जलस्तर विशाल रौद्र रुप से कटान तेज,
कई घर नदी में हुए समाहित मंजर अभी भी जारी कई घर बनेंगे नदी का निवाला हथौड़े JCB से तोड़ रहे अपना मकान पूरी रात नही सोते हैं ,गांव में कई पुस्त से रह रहे लोग अपनी आंखो के सामने ही अपने घर को सरयू नदी में समाहित हो रहा उन लोगों का रो रो कर हुआ बुरा हाल अगर बढ़ खण्ड के अधिकारी समय से ध्यान दिया होते तो इन सभी गांव को बचा लिया जाता लेकिन अब बहुत मुश्किल है आधा दर्जन गांवों को बचाना लेकिन अगर प्रशासन सही कदम उठा ले तो अभी भी समय है गांवों को बचाना।
एक तरफ योगी सरकार जनता के दुख में हर संभव मदद करने की बात करती है लेकिन बस्ती जिला में सरकार का कोई असर नहीं दिख रहा है ,सरयू नदी का जलस्तर रौद्र रुप इतना तेज़ हो गया है की कटान तेज हो गई। महुआपार कला ,मदरहवा, मईपर, बड़का पुरवा , बैड़ारी एहत माली सहित आधा दर्जन गाँव का ,अस्तित्व मिटने कगार पर आगया वही गांव को सरयू नदी कब अपने आगोस मे ले ले ग्रामीणों की नीद उड़ गईं है महुआपार कला गांव में लगभग दर्जन भर घरों को अपने आगोश में ले लिया है जब की ग्रामीण पलायन कर बंधे पर ठिकाना बनाने को मजबूर है ।
बस्ती सरयू तटबंध के किनारे बसे मईपुर, बड़ाकापुरवा, महुआपार कला और मदरहवा गांव पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं. सरयू नदी का जलस्तर के रौद्र रुप इतना तेज़ हो गया है की कटान करते हुएअबतक लगभग एक दर्जन घर ताश के पत्ते की तरह बहा ले गई बड़े-बड़े पेड़ कोन नदी मे समाते देर नहीं लगी इस मंजर को देख गांव वालों को डर सता रहा है कि कहीं उनका घर नदी में न समा जाए. इसलिए अपने घरों को हथौड़ा, और JCB लगाकर खुद तोड़ रहे हैं और सारा समान सुरक्षित जगहों पर पहुंचा रहे हैं।
जिला प्रशासन को अवगत कराया गया था कि हर वर्ष इस गांव को तबाही का मंजर झेलता रहा है इस बार गांव के 500मीटर दूर बोल्डर लगा दिया जय तो गांव बच सकता है जिला प्रशासन ने ग्रामिणों को आश्वासन देकर चले गए और आज तक जिलाप्रशासन द्वारा कोई कार्य नहीं हुआ आज इस गांव के लोगो को अपनी ही बर्बादी की मंजर देखने को मजबूर है यहां तक की अपनी ठिकाने की जगह ढूंढ रहे हैं ग्रामीण तबाह हो रहे हैं ग्रामीणों को किसी प्रकार की प्रशासन द्वारा कोई सहायता नहीं मिला प्रशासन आकर विडिओ बनाकर आश्वासन देकर चला जाता है आज ग्रामीण अपनी ही आशियाना को ताश के पत्ते की तरह है बहता देखकर उनकी आंखें नम होती हुई नजर आ रही है उन्होंने बताया कि बाढ़ की वजह से जहां हजारों बीघा खड़ी फसल बर्बाद हो गई तो वहीं अब बाढ़ का पानी घटने की वजह से कटान तेज हो गई है, जिसकी वजह से हजारों बीघा जमीन कट कर नदी में विलीन हो चुकी है. गांव वालों का आरोप है कि जिला प्रशासन और बाढ़ खंड के तरफ से नदी के कटान को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया जिसको लेकर गांव वालों में लगातार रोष बढ़ता जा रहा है. इतनाहि नही गांव वालों ने रामजानकी मार्ग को जाम कर कटान से बचाने की प्रशासन से गुहार भी लगाई. थी मगर जिलाप्रशासन एक नही सुनी सिर्फ ईंट का टुकड़ा बोरा में भरकर डाला जा रहा है लेकिन इससे कुछ नहीं रुकने वाला है , बड़ा वाला पत्थर बोल्डर गिराने से ही गांव बच सकता है ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग किया है।







