उर्स-ए-रज़वी में देश विदेश के लाखों अकीदतमंदों ने की शिरकत।

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बरेली

उर्स-ए-रज़वी में देश विदेश के लाखों अकीदतमंदों ने की शिरकत।

जो सब से बड़ा आशिके रसूल वही देश का वफादार है: मुफ्ती सलीम नूरी

उर्स ए रज़वी के आखिरी दिन आला हज़रत फाजिले बरेलवी के कुल शरीफ की रस्म अदायगी के साथ तीन रोज़ा उर्स का समापन हो गया। 

बरेली रज़ा नगरी में रज़वी दीवानों का उमड़ता सैलाब नज़र आया। शहर के हर तरफ जायरीन ही नज़र आ रहे थे। आज का आगाज़ रज़ा मस्जिद में कुरानख्वानी से हुआ सुबह 8 बजे महफ़िल का आगाज़ दरगाह प्रमुख हज़रत मौलाना सुब्हान रज़ा खान(सुब्हानी मियां) की सरपरस्ती,और सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रज़ा क़ादरी (अहसन मियां) की सदारत व सय्यद आसिफ मियां और राशिद अली खान की देखरेख में इस्लामिया मैदान में कारी ज़ईम रज़ा मंज़री ने किया।कुल के बाद सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन मियां और मारहरा के सज्जादानशीन हज़रत मौलाना सय्यद नज़ीब हैदर(नजीब मियां के साथ नबीरे आला हज़रत मौलाना तौसीफ मियां ने मुल्क ए हिंदुस्तान समेत दुनियाभर में अमन ओ शांति की दुआ की। मुफ्ती अहसन मियां ने मुफ्ती सलमान अजहरी की रिहाई के अलावा फिलिस्तीनी मुसलमानो के लिए भी दुआ की। उर्स में इंग्लैंड, मारीशस, आस्ट्रेलिया,साउथ अफ्रीका, नेपाल,श्री लंका, दुबई, सऊदी अरब के अलावा मुल्क के कोने-कोने से जायरीन ने शिरकत की। दिन भर दरगाह पर गुलपोशी और फतिहाखवानी का सिलसिला चलता रहा। इसके बाद हम्द,नात-मनकबत का नज़राना इंग्लैंड से आए मुफ्ती कमर रज़ा मरकजी, अमान मियां, रिज़वान रज़ा रिज़वानी आदि ने पेश किया।

मेहमान ए खुसूसी मारहरा शरीफ के सज्जादानशीन हज़रत मौलाना सय्यद नजीब हैदर मियां* ने कहा की हम अपने हक़ की लड़ाई अपने मुल्क द्वारा बनाए कानून के दायरे में रहकर लड़ाई जारी रखे। उन्होंने आगे कहा कि मैं अली की औलाद हूं और मेरे रगों में मौला अली,शहीद ए कर्बला हज़रत इमाम हुसैन का खून है। हम हक बयान करने आए है। अल्लाह के रसूल के खलीफा है उनमें पहला नंबर हज़रत अबूबकर सिद्दीक,दूसरा हज़रत उमर फारूक,तीसरा हज़रत उस्मान गनी का और चौथा नंबर हज़रत अली का है। सोशल मीडिया और यू ट्यूबर वाले उलेमा से दूर रहे।

नबीरे आला हज़रत मुफ्ती अर्सलान रज़ा क़ादरी* ने कहा आला हज़रत फाजिले बरेलवी के इस दुनिया से 1921 में तशरीफ़ ले जाने के बाद सुन्नियत पर हर तरफ से हमले हो रहे थे ऐसे वक्त में आला हज़रत के दोनो शहज़ादे हुज्जातुल इस्लाम और मुफ्ती ए आज़म ए हिंद ने सन 1925 में एक मुहिम छेड़ी जिसमें आपसी मतभेद भुलाकर मुल्क भर के उलेमा की राय से मज़हबी और मसलकी मामलात के अलावा कौमी, मिल्ली, सियासी मसाइल के लिए काम किया। आज फिर उसी दौर की ज़रूरत है सभी सुन्नी खानकाहे और उलेमा एक जुट होकर काम करे।

मुफ्ती सलीम नूरी बरेलवी ने* कहा कि जो सबसे बड़ा आशिके रसूल वही सच्चा मुसलमान सबसे बड़ा देश का वफादार है। मुसलमानो को अपने देश प्रेमी होने का किसी से प्रमाण लेने की जरूरत नही है। हम अपने मज़हब और मुल्क के सच्चे वफादार बने रहे। मुसलमान आपने आप को कम तर न आके। आला हजरत का वफादार कल भी अपने मज़हब का और अपने मुल्क का वफादार है और रहेगा। बड़े बड़े सुन्नी उलेमा ने देश के लिए अपनी जान देकर कुर्बानियां दी है। सोशल मीडिया पर गैर मसलक के लोगो की तकरीर सुनने से परवेज़ करे। नशे और जुए, शराब जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रहे। लड़कियों के लिए सरकार द्वारा मानक पूरे कर स्कूल खोले जाएं तालीम को आम करने का काम करे।उर्स की महफिल में लोगो ने मुफ्ती सलमान अजहरी के लिए रिहाई की मांग की। इस पर मदरसा मंजर ए इस्लाम के सदर *मुफ्ती आकिल रजवी* ने सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन मियां के हुक्म से एलान किया की बरेली मरकज हमेशा उनके साथ है और आगे भी रहेगा। उनकी रिहाई के लिए हर संभव कोशिश की जा रही है। मरकज को जब ज़रूरत आएगी तब आपको लब्बैक कहना है। सब्र से काम ले। दीन के खातिर बड़े-बड़े उलेमा जेल गए। वक्त आने पर उनको भी अल्लाह की तरफ से राहत मिली उसी तरह सलमान अजहरी को भी राहत मिलेगी। साथ ही मुसलमान सामाजिक बुराइयों से दूर रहे। क्योंकि खुदा के कानून से बगावत करने वालों को कोई देश की हुक़ूमत से राहत नही मिल सकती। 

मौलाना सलीम रज़ा* नेअपनी तकरीर में कहा कि आज का मुसलमान सोशल मीडिया का इस्तेमाल सिर्फ और सिर्फ अपनी ज़रूरत के मुताबिक करे। दीनी मसले-मसाइल सुन्नी उलेमा से ही सीखे न की सोशल मीडिया से। मौलाना आफाक रज़ा ने कहा आला हज़रत अपनी पूरी जिदंगी लोगों के दिलों पर राज करते रहे है और हमेशा राज करते रहेंगे।

मुफ्ती फारूक रज़ा कश्मीरी* ने कहा कि हिंद में कन्या कुमारी से लेकर कश्मीर तक आला हज़रत की तालीमत(शिक्षा) पर अमल किया जा रहा है। बरेली के मरकज पर पूरी दुनिया को फख्र है।मुफ्ती इमरान हनफी* ने कहा की आज दुनिया का समझे बड़ा समाज सुधारक कोई है तो हमारे नबी है जिन्होंने इंसान ही के हक के लिए अपनी आवाज बुलंद नही की बल्कि पशु पक्षियों के हक की भी बात की। आज उन्ही की ज़ात पर कुछ देश के गद्दार न ज़ेबा बयान वाजी कर रहे है। हमारा मुल्क हिंदुस्तान महान है जिसमें गरीब नवाज़ अजमेरी और बरेली के आला हजरत आराम फरमा है। 

मौलाना जिकरुल्लाह और मौलाना नेमतुल्लाह* ने सहाबा इकराम की अजमत बयान करते हुए कहा की चारों सहाबा हम सुन्नियों के लिए अफ़ज़ल और काबिले एहतराम है। आगे कहा की आला हज़रत और बरेली का पैगाम मुहब्बत है उसको दुनिया भर में आम करे। इस्लाम का अहम फर्ज़ नमाज़ है और हमारे नबी की आंखो का सुकून है इसलिए मुसलमान कितने भी परेशानी में हो नमाज़ अपने वक्तो पर ही अदा करे। 

मुफ्ती गुलफाम रामपुरी* ने कहा मुसलमान अपनी जिंदगी इस्लाम के मुताबिक गुजारे। इश्क ए मुस्तफा में डूब कर सुन्नीयत के मिशन के लिए काम करते रहे। दरगाह के नासिर कुरैशी ने बताया कि ठीक 2 बजकर 38 मिनट पर खानकाहे तहसीनिया के सज्जादानशीन हज़रत हस्सान रज़ा खान(हस्सान मियां) हज़रत सिराज मियां,मुफ्ती फ़ैज़ मियां,सूफी रिज़वान मियां आदि की मौजूदगी में कारी ज़ईम रज़ा अली व कारी रज़ा अली,कारी अमान रज़ा ने फातिहा पढ़ी शिजरा नबीरा आला हज़रत शीरान रज़ा खान ने पढ़ा। दुआ की बाद सलातो सलाम महशर बरेलवी ने पढ़ा। मौलाना मुख्तार बहेडवी,मौलाना इंतज़ार क़ादरी,मौलाना कमाल मुस्तफा,मौलाना नूर अहमद अजहरी,मुफ्ती अख्तर,मुफ्ती अफरोज आलम, कारी अब्दुल रहमान,मौलाना बशीर उल कादरी आदि लोग मौजूद रहे। कुल उर्स-ए-रज़वी में देश विदेश के लाखों अकीदतमंदों ने की शिरकत।के बाद हजारों लोग दरगाह प्रमुख हज़रत सुब्हानी मियां के हाथो मुरीद हुए।

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Author: B9News24

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