ब्रेकिंग न्यूज़… मुरादाबाद।
*बीएसपी से समाजवादी पार्टी में ज्वाइन होने के बाद नसीमुद्दीन सिद्दीकी का मुरादाबाद में पहला दौरा*,

सपा नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने मुरादाबाद दौरे के दौरान योगी सरकार और भाजपा की नीतियों पर तीखा प्रहार किया।
अखिलेश यादव की ‘PDA’ रणनीति को धार देने निकले सिद्दीकी ने कानून व्यवस्था से लेकर महंगाई और बुलडोजर कार्रवाई तक पर सरकार को घेरा।
PDA सिर्फ पिछड़ा, दलित या अल्पसंख्यक नहीं है, बल्कि इसमें हर वो व्यक्ति शामिल है जिसका हक मारा गया है, चाहे वह सवर्ण ही क्यों न हो।
सरकार डर की सत्ता कायम करना चाहती है। मुरादाबाद से लेकर बनारस की 300 साल पुरानी दाल मंडी तक को उजाड़ दिया गया। जनता को भुखमरी की कगार पर ला दिया है।
आजम खान साहब पूरी तरह निर्दोष हैं। 2027 में सपा की सरकार बनते ही उन्हें न्याय दिलाया जाएगा। उन पर गलत इल्जाम लगाकर जेल भेजा गया है।
बंगाल और बिहार जैसे राज्यों में चुनाव आयोग भाजपा की कठपुतली बना हुआ है। ट्रेनिंग शुदा अधिकारियों को भेजकर मतदाताओं को डराया जा रहा है।
नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने बताया कि सपा ज्वाइन करने के बाद से वे 50 जिलों का दौरा कर चुके हैं। मुरादाबाद में 11 बैठकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, मैं अखिलेश यादव जी से प्रेरित होकर दिन-रात काम कर रहा हूँ। हमारा मुकाबला बेईमानों और गरीबों का दमन करने वालों से है।
*महंगाई और किसान बदहाली*
सिद्दीकी ने खाद की किल्लत और बढ़ती कीमतों पर सरकार को घेरते हुए कहा कि मुलायम सिंह जी के समय जो खाद का कट्टा 50 किलो का था, उसे घटाकर अब 40 किलो कर दिया गया है और दाम 1650 रुपये तक पहुँच गए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि नोटबंदी के बाद अब जल्द ही डीजल-पेट्रोल के दाम भी आसमान छूने वाले हैं।
*सुरक्षा और सामाजिक न्याय*
मेरठ और सीतापुर की घटनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “बोलने पर बुलडोजर चलाने की धमकी दी जाती है। दलित समाज की मां-बेटियों पर जुल्म हो रहा है। अगर मेरा घर मिलिट्री एरिया (डिफेंस प्रॉपर्टी) में न होता, तो ये मेरे यहाँ भी बुलडोजर भेज देते।
खुद को केवल मुस्लिम नेता के तौर पर सीमित किए जाने पर उन्होंने कहा, “मैंने 36 साल दलितों और पिछड़ों के बीच काम किया है। मुझे सिर्फ मुस्लिम लीडर कहना मेरे और समाज के साथ नाइंसाफी होगी। मैं मानवता के आधार पर काम करता हूँ।
*बसपा की स्थिति पर अफसोस*
कांशीराम जी का जिक्र करते हुए उन्होंने दुख जताया कि जिस पार्टी को बनाने में उन्होंने जिंदगी लगा दी, आज उस बसपा की दीवारें कमजोर होती दिख रही हैं।






