जनपद फतेहपुर
फतेहपुर में बने दुनिया का पहला राष्ट्रीय जल विश्वविद्यालय –
जल एवं पर्यावरण संरक्षण के अभियानकर्ता प्रवीण पांडेय ने केंद्र व प्रदेश सरकार से की पहल की मांग

फतेहपुर। आकांक्षी जिले फतेहपुर में दुनिया का पहला जल विश्वविद्यालय स्थापित करने की मांग उठी है। जल एवं पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में अभियान चला रहे प्रवीण पांडेय ने केंद्र और प्रदेश सरकार से इस दिशा में पहल करने का आह्वान किया है। पांडेय लंबे समय से तालाबों, नदियों, पारंपरिक जलस्रोतों और जल संरक्षण से जुड़े मुद्दों को लेकर जनजागरूकता अभियान चलाते रहे हैं।
पांडेय के अनुसार गंगा-यमुना के दोआब में स्थित फतेहपुर की भौगोलिक परिस्थितियां जल अध्ययन और अनुसंधान के लिए महत्वपूर्ण हैं। जिले से गंगा, यमुना, पांडु, ससुर खदेरी और रिंद जैसी नदियां एवं जलधाराएं जुड़ी हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में तालाब, कुएं और अन्य पारंपरिक जलस्रोत भी हैं। ऐसे में जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण और जल प्रबंधन के लिए स्थानीय स्तर पर अध्ययन और शोध की जरूरत है।
प्रवीण पांडेय ने केंद्र और प्रदेश सरकार से फतेहपुर में राष्ट्रीय जल विश्वविद्यालय की स्थापना की प्रक्रिया शुरू करने, विशेषज्ञों की समिति गठित करने और इसकी व्यवहार्यता का अध्ययन कराने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि प्रस्ताव को केवल मांग तक सीमित रखने के बजाय विश्वविद्यालय के स्थान, पाठ्यक्रम, शोध केंद्र और संसाधनों की रूपरेखा तैयार करने पर काम होना चाहिए।
उनके प्रस्ताव के अनुसार विश्वविद्यालय में जल विज्ञान, जल प्रबंधन, जल अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी, भूजल संरक्षण, नदी एवं तालाब पुनर्जीवन, जलवायु परिवर्तन और जल आपदा प्रबंधन जैसे विषयों पर उच्च शिक्षा और शोध की व्यवस्था की जा सकती है।
पांडेय का कहना है कि प्रस्तावित विश्वविद्यालय में वर्षाजल संचयन, भूजल पुनर्भरण, सूक्ष्म सिंचाई, जल-कुशल कृषि और जल संरक्षण की आधुनिक तकनीकों पर शोध किया जा सकता है। गांवों के पारंपरिक जलस्रोतों की मैपिंग और उनके वैज्ञानिक पुनर्जीवन को भी शोध का हिस्सा बनाया जा सकता है।
जल संरक्षण के क्षेत्र में अपने अभियान का उल्लेख करते हुए पांडेय ने बताया कि उनकी पुस्तक ‘जलनिधियों को जीने दो’ भी प्रकाशित हो चुकी है। उनका कहना है कि जल संरक्षण को जनजागरूकता तक सीमित रखने के बजाय शिक्षा, तकनीक और शोध से जोड़ने की आवश्यकता है।
फतेहपुर के 200 वर्ष पूरे होने के अवसर पर जिले के दीर्घकालिक विकास से जुड़ी मांगों में राष्ट्रीय जल विश्वविद्यालय की स्थापना को भी शामिल किया गया है। पांडेय का कहना है कि विश्वविद्यालय की स्थापना से जल और पर्यावरण से जुड़े विषयों में उच्च शिक्षा के अवसर बढ़ेंगे और स्थानीय जल समस्याओं पर शोध को संस्थागत आधार मिल सकता है।
उन्होंने केंद्र और प्रदेश सरकार से फतेहपुर में दुनिया का पहला जल विश्वविद्यालय स्थापित करने की दिशा में आवश्यक प्रक्रिया शुरू करने और इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार करने का स्पष्ट आह्वान किया है।
पांडेय के अनुसार, “हर हाथ को काम, किसानों को सम्मान और खेतों को पानी” के उद्देश्य के साथ जल विश्वविद्यालय की मांग को आगे बढ़ाया जा रहा है।







